जन्म
पहचाने जब अनजाने लोग देखी दुनिया और उसकी सोच कोई अपना जब दूर गया या कोई दूर से पास आ गया मिली खुशी या आयी विपदा संतोष मिला या मिली जो चिंता तृष्णाओं को जब भी नापा शब्दों के अर्थों को मापा जब जब ख़ुद को पढ़ा है मैंने अंतर्मन को सुना है मैंने तब तब मेरे...
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Shikha Deepak
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[25 Mar 2009 02:44 AM]



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