सिनेमा और मैं.....
कल रात ब्रजेश्वर मदान सर ने एक मैसेज भेजा था....सिनेमा पर.... (वही मदान सर जिन्हें सिनेमा पर लिखने के लिए पहले नेशनल एवॉर्ड से नवाज़ा गया ) उसमें लिखा था.... शेक्सपियर ने दुनिया को रंगमंच की तरह देखा.... जहां हर आदमी अपना पार्ट अदा करके चला जाता है.....
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tanu sharma.joshi
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[24 Mar 2009 23:48 PM]



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