उसके चहरे का संतोष लोगों को खलता है....

काहे को ब्याहे बिदेस.... बात उन दिनों की है जब दिल्ली में जमुना नदी पर एक ही पुल था. उसे पढ़ाने के लिए पिता ने क़र्ज़ लिया था. वह रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर, दिल्ली में सड़कों की ख़ाक छान रहा था। एक कमरा तीमार पुर में किराए पर लिया था किन्तु एडवांस देने के बाद... [पूरी पोस्ट]
writer neera
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[24 Mar 2009 21:01 PM]

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