ऐसा भी लेकिन हो पाया कई दिनो के बाद और क्षमा

हृदय गवाक्ष आज बढ़ी इतनी तनहाई, खुद को अपनी बात बताई, ऐसा भी लेकिन हो पाया, कई दिनो के बाद, खुद से मिलने की फुरसत थी कई दिनो के बाद। वक़्त नही खुद से मिलने का ऐसा तो कुछ यार नही, पर खुद से मिलने की खातिर मैं खुद ही तैयार नही, क्योंकि खुद से मिलने का मतलब होगा तुम... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
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[24 Mar 2009 03:52 AM]

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