हे हर हार आहार सुत
हे हर हार आहार सुत विनय करू कर जोर ! एक छोटी सी विनती सुनो तुम मोर !! कितने सारे लोग लिख रहे नित्य नूतन लेख ! राम का नाम लेके लिखो आप भी आलेख !! मिल गयी लेख पर टिप्पणिया तो समझे लंका जराये ! नहीं मिली अगर तो समझो बिन बूटीवाला पर्वत लाये !! बहुत हुआ र...
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आलोक सिंह
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[24 Mar 2009 03:50 AM]



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