कवि की व्यथा
अविनाश अगरवाल, बोस्टन रविवार सुबह देखा , मौसम का रंग था सुहाना देख वसंत की मस्ती , हमारा भी दिल हुआ दीवाना लगा आज हमारी कविता का होगा श्रीगणेश कवियों की सूची में कहीं , हमारा भी होगा समावेश क़दमों ने था अभी , लेखनी की ओर मुख मोडा श्रीमती ने पकडाया ,...
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kavitaprayas
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[23 Mar 2009 20:48 PM]



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