पादुका महिमा

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) आज शाम से मन में जूता छाया हुआ हैं। कुछ गंभीर मन्नन का मन भी नहीं हैं (आख़िर रविवार की शाम जो हैं) तो सोचा इसी विषय पर विचार उद्धत करुँ। अब आप भी सोचेंगे कि बैठे बठाये यह जूता चर्चा कहाँ से आ गयी। चलिए इस संशय को भी दूर कर दूँ । हुआ यूँ कि हम आपनी सा... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[09 Feb 2009 22:45 PM]

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