मैं समय हूँ ...

मैं समय हूँ ... कल से चार पंक्तियां जहन मे चल रही है एक मुक्तक के रूप मे , सबसे पहले आप सब से ही बांट रहा हू , कि - चले हैं इस तिमिर को हम , करारी मात देने को जहां बारिश नही होती , वहां बरसात देने को हमे पूरी तरह अपना , उठाकर हाथ बतलाओ यहां पर कौन राजी है , हमारा सा... [पूरी पोस्ट]
writer डा. उदय ’ मणि ’
views
30
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[23 Mar 2009 12:40 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix