शब-ऐ-गम से जो हो खौफ अगर
शब - ऐ - गम से जो हो खौफ अगर इक शमा - ऐ - उम्मीद जलाया कीजिये यू तन्हाइयो से न कभी घबराइए किसी गैर को अपना बनाया कीजिये न कीजिये गिला औरो की बेवफाई का आप अपना वायदा निभाया कीजिये तय कीजिये गैरो की खुशी खातिर अपनी हसी में गम को छुपाया कीजिये चाहे कभी...
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Rahul kundra
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[23 Mar 2009 06:03 AM]



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