तेरी जगह जुबान पर अब उसका नाम आया है
अमृता जी अपने सपनों पर और कुदरत की शक्तियों पर यकीन रखती थी ..यह आभास उनकी ही लिखी हुई कई किताबों को पढ़ कर होता है ..इसी कड़ी इस जिस किताब से पिछली पोस्ट को मैंने लिखा उस किताब का नाम है अनंत नाम जिज्ञासा .उनका मानना था कि न जाने किस किस काल के स्मरण...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[23 Mar 2009 03:35 AM]



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