कामान्ध राजा और रेगिस्तान की छिपकली

KISHORE CHOUDHARY सखी, तुम्हारी कौमार्य अवस्था के कारण इस कथा को सुनते समय मन में श्लील-अश्लील के राग उत्पन्न हो सकते हैं किंतु ये महज मनोवेग हैं और परिस्थितियों के अनुरूप बदलते रहते हैं। आज ग्यारहवीं सदी के इक्कीसवे वर्ष के मध्याह्न माह के पुष्य नक्षत्र के अमृत सिद्ध... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary
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[22 Mar 2009 23:08 PM]

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