तुझको मैने याद किया है, और कुछ किया भी नहीं.......
मैंने हमेशा तुझे, इस जिंदगी में खुश ही देखा, या तेरी रहगुजर में, दुःखों को तलाशा ही नहीं, ये कहूं तो, सच भी है और झूठ भी है, तुझको मैने याद किया है, और कुछ किया भी नहीं। जब कभी शाम की तन्हाई में, तू रहा भी हो, मैने अपनी तन्हाई में, तुझको पुकारा भी नह...
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PREETI BARTHWAL
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[22 Mar 2009 20:40 PM]



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