GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य भारत वाले देख रहे थे महायुद्ध के सपने जो नहीं समझे वह भी समझे जो समझे वह समझे ऐसी हवा थी युद्ध का खेल ही खेल रहे थे बच्चे उन्तीस मार्च को बैरकपूर में लड़ गये मंगल पांडे अब तक याद है फाँसी के फन्दे में ऐंठन गर्दन की सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा सुनो सत्... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[21 Mar 2009 15:45 PM]

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