नारी बनाम वृक्ष
नहीं जानती क्या अच्छा है, क्या बुरा और उसे जानने से पहले अपने को जानना चाहा तो पाया---- मैं हड्डियों की शाखों पर मांसल फलों से भरा एक वृक्ष हूँ जिसे माली ने बहुत ही प्यार से वात्सल्य के अवलम्ब से, ममता के पोषण से, फटकार की धूप से, प्रेरणा के जल से सि...
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Jyotsna Pandey
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[21 Mar 2009 11:03 AM]



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