वो शाम

kuch sapno ki khatir वो एक हसीं शाम थी शायद वो उनके नाम थी हर नजारे में उनका चेहरा था वो तो गज़ब की शाम थी उस राह से हम गुज़रे ही थे अचानक नज़र वो आ गए उनसे निगाहें क्या मिली उनके चेहरे का रंग बदल गया चेहरा सफ़ेद से सुर्ख हुआ सुर्ख रंग शर्म में बदल गया करीब से वो गुजरे ही थ... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[21 Mar 2009 08:49 AM]

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