स्माईली: बहार आई तो खुल गए हैं नए सिरे से हिसाब सारे!

ई-स्वामी अगर देखने को फ़ैज़ की नज़र ना मिलती उधार, तो वैसा नहीं आता, जैसा खूबसूरत आया है बसंत. ज़रा ग्लोबलवार्मिंगग्रस्त इस सुंदर बसंत में अच्छी भली साहित्यिकता मौज लेने वालों की तत्काल सृजनशीलता की शिकार हो रही है! चलिए तो हम क्यों पीछे रहें.. एकाध नज़्म का शिकार... [पूरी पोस्ट]
writer eswami
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[21 Mar 2009 02:16 AM]

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