क्या नेशनल बुक ट्रस्ट में कुनबाबाद चलता है ?
एक दिवसीय साहित्य महोत्सव पर निजी टिप्पणी ) हमें किसी पर ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है, जब तक हम वैसी हरक़त करने की समस्त संभावनाओं से ख़ुद को मुक्त न कर लें । वैसे यह बड़ा जोख़िम भरा उद्यम है - एक साधना की तरह, यह हम बख़ूबी जानते हैं, फिर भी आज...
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जयप्रकाश मानस
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[21 Mar 2009 01:05 AM]



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