अंतर्मन पे अभिव्यक्ति (नीसू जी की कविता से प्रेरित)
नीसू जी की कविता पढ़ी मन (http://neeshooalld.blogspot.com/2009/03/blog-post_20.html), बड़ी सरल और छोटी। मेरे कवि ने भाव उधार लिए और चार पंक्तियाँ रच ली...:-) अंतर्मन बस एक झरोखा सच है या फ़िर कोई धोखा मन की गति तो मन ही जाने भला सोंच के भी क्या होगा चाल...
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राकेश
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[20 Mar 2009 18:22 PM]



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