ऊपर क्या, नीचे भी देखा करिए साहिब
ऊपर क्या , नीचे भी देखा करिए साहिब अपनी परछाई से कभी न डरिए साहिब पुरी उमर आदमी बनना हमने सिखा अर्थ देवता का हमसे मत कहिये साहिब वो जो हाथ जोड़ कर रोज़ मिला करते है उनके हाथो में तलवार न रखिए साहिब सरिता के तट पर तो चल कर सबने देखा सरिता की लहरों पर...
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Rahul kundra
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[20 Mar 2009 07:30 AM]



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