बनती-बिगड़ती डगर क्युं है

duniyakalamkinazarse बनती - बिगड़ती डगर क्युं है मेरे ख्वाबो में तेरा घर क्युं है यू तो शहर खंडहर निकला कब्रिस्तान संगमरमर क्युं है आपके हाथो में तो गुलेल भी नही पंछी का मगर गिरा पर क्युं है सफर तो तय कर लिया लेकिन कश्ती को साहिल से डर क्युं है ' प्लेटो ' के लिए खुल गए क... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul kundra
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[20 Mar 2009 07:15 AM]

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