वक्त लगा पर किस्सा खत्म हुआ
उलझा उलझा सा है बहुत कुछ। कई बार दिमाग इतने गहरे और उथले स्तर पर किलोलें करता है कि भाव पकड़ना मुश्किल हो जाए। ऐसे ही किसी चंचल और व्यग्र वक्त को शब्दों में पकड़ने की कोशिश।) कई कई दिनों की बेचैनी और आए दिन की कलह... बादल छंटने को हैं। र...
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तरूश्री शर्मा
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[20 Mar 2009 01:52 AM]



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