अबकी होली और समीर लाल की संगत
इस बार जबलपुर जाने का ख़ुमार अलग रहा. अबकी होली के रंगों में कुछ वायवीय, कुछ शरीरी और कुछ अलौकिक अनुभूतियाँ घुली हुई थीं. संकोच के साथ सूचना दिए देता हूँ कि मेरी पत्नी को और मुझे पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई है, वह भी जबलपुर में. संस्कारधानी के मार्बल सि...
[पूरी पोस्ट]
विजयशंकर चतुर्वेदी
54
6
0
6
10
[20 Mar 2009 00:51 AM]



Shuffle








