तुमसे एक गुजारिश है कि
सुनील मंथन शर्मा मौत तू जाना अपनी जगह पर, तुमसे एक गुजारिश है कि जाने से पहले मुझे फिर से एक जिन्दगी दे जाना कि जी सकूँ तेरे दुश्मन-संघषों के साथ कि जी सकूँ वक्त के थपेडों, दम घुटती सांसों के साथ और बनाऊं एक ऐसा जीवन जहाँ आने से पहले तेरी रूह कापें म...
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सुनील मंथन शर्मा
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[19 Mar 2009 15:10 PM]



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