नि:शब्द और खामोश
श्याह काली रातों में कुछ अहसासों के रेले ख्वाहिशों की गठरी लेकर मेरे पास आते हैं ! एक-एक कर सारे अहसास अपनी ख्वाहिशों की गठरी मेरे आगे खोलकर मुझसे मांगते हैं ! उन सारे अनछुए लफ्जों को जो मैंने कभी चुने थे ख्वाहिशों के साथ मिलकर सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्ह...
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NirjharNeer
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[19 Mar 2009 06:48 AM]



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