कुर्सी मैय्या कुर्सी बाप - व्यंग्य

मैं समय हूँ ... कुर्सी मैय्या कुर्सी बाप, कौन खेत की मूली आप" आज श्रेश्ठ व्यंगकार डा योगेन्द्र मणि जी के एक व्यंग की पे पंक्तिया काफ़ी देर जहन में घूमती रही फ़िर जो कुछ घूम रहा था उससे मैने इन दो पंक्तियो को इस तरह से बढाने की कोशिश की है कि कुर्सी मैय्या कुर्सी बाप,... [पूरी पोस्ट]
writer डा. उदय ’ मणि ’
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[19 Mar 2009 04:28 AM]

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