“जब मौत को मैंने देखा अपने बहुत ही करीब…

दिल के दरमियाँ अनिल कान्त जी का संस्मरण "एनोदर डे ऑफ़ माय लाइफ " को पढ़कर बीता बचपन याद आ गया… उम्र तो ठीक से याद नहीं है, बस इतना याद है कि हम छोटे थे। हम मम्मी पापा के साथ शहर में रहते थे।हमारी इकलौती बुआजी गाँव में रहती थी। हमने कभी उनका गाँव देखा नहीं था कारण म... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Bhawna
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[19 Mar 2009 01:17 AM]

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