GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य यह सब देख के अंग्रेजों के पाँव की धरती सरकी सोन किनारे ऐसे ही में झूमके आई दोरी (यह मेला अब भी लगता है) मेंढे गायें बरघों की जोड़ी (बैलों की जोड़ी) और घोड़ा हाथी बच्चे कच्चे बूढ़े वाले मर्द के साथ लुगाई (पति-पत्नी) धूम धड़क्का भीड़ भड़क्का गीत पे ढोलक भी ठन... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[18 Mar 2009 15:31 PM]

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