चिड़ियाँ
चिड़ियों का हौसला देखिए वो चाहे जहाँ आ-जा सकती है सवर्णों के कुओं पर पानी पीती है हरिजनों के घरों के दाने चुगती है हम ऐसा कुछ भी तो नहीं कर सकते ऐसा करने के लिए हममें चिड़ियों-सा हौसला चहिए । - शहंशाह आलम युवा कवि शहंशाह आलम की कविताओं का एकल काव्य-पाठ...
[पूरी पोस्ट]
अरविन्द श्रीवास्तव
19
1
0
1
3
[18 Mar 2009 12:40 PM]



Shuffle








