एक पत्र पब प्रेमी बाला के नाम

सुमित के तड़के (गद्य) प्यारी पब प्रेमी बाला, सादर पबस्ते, कल आधी रात के समय एक पब के बाहर तुम्हारे दिव्य दर्शन हुए। दारु के नशे में टुल्ल हो अर्द्धनग्नावस्था में तुम अपने पब सखा के होठों को गन्ने की भांति चूसने में मस्त थीं। ऐसा दुदृश्य देखकर स्वयं को ही छुपाने का स्थान ख... [पूरी पोस्ट]
writer सुमित प्रताप सिंह
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[18 Mar 2009 12:05 PM]

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