प्रतिष्ठा !! (कहानी) भाग - 2

संवेदना संसार रामेश्वर अपनी ही बेटी के खून से अपने हाथ रंग आये थे...तेरह बरस में शादी और गौने से पहले ही साल भर के अन्दर विधवा हुई बेटी का दुःख उनसे देखा नहीं गया और उसके मोह में पड़कर घर परिवार सबकी बात काटते हुए उन्होंने अपनी अपार सहृदयता दिखाते हुए उसे पढाई में... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना
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[18 Mar 2009 02:53 AM]

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