ग़ज़ल - ठौर ना ठिकाना है
ठौर ना ठिकाना है हाल शायराना है प्यार ही कमाना है प्यार ही लुटाना है दर्द का हमारे घर खूब आना जाना है रौशनी जो दे सबको दीप वो जलाना है अक्ल वाले अंधों को आइना दिखाना है कवि दीपक गुप्ता 9811153282 - 9311153282 www.kavideepakgupta.com Delhi NCR , India...
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kavideepakgupta
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[18 Mar 2009 01:50 AM]



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