सैलाब

रजनीगन्धा दर्द का सैलाब रुक गया था कागज़ के कोने पर अहसास हो रहा था कोने से टपक कर गिरी जो एक भी बूँद अन्तराल की गहराईयों तक जाएगी जहाँ अँधेरा काली चिकनी चट्टान सा शून्य सा जड़ आहिल्या की तरह पाषाण सा होगा और दर्द की बूँद जब टपक कर गिरेगी अन्तर्नाद करती हुई एक उ... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
views
45
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
11
[17 Mar 2009 22:51 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix