नौकरी की टोकरी पार्ट 2
जब मैं एक हाउस वायिफ थी, क्या कूल मेरी लाइफ थी ! पर काल चला चाल, देख मेरी वो हंसी, मैं नौकरी की टोकरी के जाल मैं फँसी | हाँ, थी मेरी तमन्ना , मेरा भी व्हाइट कोल्लर होगा, होगी मेरी एक पहचान और जेब में डॉलर होगा , पर डॉलर आया बाद में, पहले जीवन ही कट ग...
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kavitaprayas
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[17 Mar 2009 15:41 PM]



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