दोपहरी
मार्च एप्रिल का महीना। घनी छाँव सी छनी धूप घर के पिछवाड़े पर पड़ती थी। धूप ,छाँव पहन थोड़ी सी ठंडी होकर गुनगुनी सी बदन को छूती थी। नींबू के पौधों से हल्की सी खट्टास ताज़गी की तरह उठती। मुझे यहाँ बैठना अच्छा लगता था। गर्म हवायें आम के पेड़ की साँसों क...
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Beji
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[17 Mar 2009 14:57 PM]



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