पांच साल बाद फिर एक सपना
इन दिनों मैं बड़ी उलझन में हूं। क्योंकि आजकल मुङो रात में सपने नहीं आते। इस परेशानी को किसी को बताते हुए शर्म आती है! इसमें कोई कुछ कर भी तो नहीं सकता! सारे सपनों पर आजकल नेताओं और अभिनेताओं ने कब्जा कर लिया है। सपनों का इन लोगों ने कॉपीराइट करा लिया...
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अखिलेश चंद्र
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[17 Mar 2009 07:06 AM]



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