kuch kavitayen kuch hain geet
ब्लॉग मित्रों , आप लोगों की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के प्रताप से मुझमें भी आपनी नई-पुरानी रचनाओं को पोस्ट किए चले जाने का चस्का लग गया है सो आपलोग अब अपनी करनी का फल प्राप्त करो..... और एक रचना झेलो - मैं गर्म ,तपती हुई रेत पर , पानी की एक बूँद, मैं ,...
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सीमा रानी
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[16 Mar 2009 12:47 PM]



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