मेरा खुला पत्र योगेश समदर्शी के नाम
समदर्शी जी नमस्कार….
ये खुला पत्र मैँ आपको इसलिए नहीं लिख रहा हूँ कि मेरे पास लिफाफा खरीदने के लिए खुले पैसे नहीं हैँ। एक्चुअली क्या है कि मेरे पास लिफाफे को बन्द करने लायक ज़रूरी गोंद नहीं थी तो मैँने सोचा कि…….अब आप कहेंगे कि गोंद...
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राजीव् तनेजा
व्यंग्यहास्यलेखकहोलीयोगेश समदर्शी
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[16 Mar 2009 10:44 AM]



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