हम उलटी दिशाओं के बादल
उस दिन आसमान साफ था बादलों में हलचल थी वो अचानक मिले जब उन्हें होश आया तो काफी आगे निकल चुके थे वापस आना संभव न था उस दिन बदली ने कहा मैं हवाअों के वश में हूं मेरी किसमत में हैं पहाड़ों की चट्टानें मेरे सामने हैं न खत्म होने वाली राहें बिछड़ते हुए उदास...
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MANVINDER BHIMBER
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[16 Mar 2009 07:43 AM]



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