कोई तुम्हे चाहता है...

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... सागर के किनारे छोटे से घर मे वो रहता था, अकेला खाता, अकेला जीता और खुद की किस्मत को कोसा करता था, लगता था उसे कि कोई उसे चाहने वाला नहीं, कभी हँसा नहीं, बस अकेला रोया करता था, यहाँ वहाँ भटकता, पर मन मे बस उदासी थी, जैसे टकराती लहरों के नीचे अजीब सा ठ... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[16 Mar 2009 04:49 AM]

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