शिवगंगा में संगम
उफ... ऐसे नहीं... क्या कर रहे हो... मेरा पैर ढको... जैसी विचलित करने वाली आवाज से मैं जूझ ही रहा था कि धडाधड पप्पियों-झप्पियों की बारिश होने लगी। यह सब कुछ हो रहा था मेरे सामने वाली बर्थ पर। बात 14 मार्च की है। मैं शिवगंगा एक्सप्रेस से वाराणसी से ग...
[पूरी पोस्ट]
ashabd
26
0
0
0
3
[16 Mar 2009 03:35 AM]



Shuffle








