मेरा अश्वमेघ यज अधूरा है ..अधूरा रहे !

अमृता प्रीतम की याद में..... अमृता की आत्मकथा रसीदी टिकट में एक वाकया है कि किसी ने एक एक बार उनका हाथ देख कर कहा कि धन की रेखा बहुत अच्छी है और इमरोज़ का हाथ देख कर कहा की धन की रेखा बहुत मद्धम है .इस पर अमृता हंस दी और उन्होंने कहा की कोई बात नहीं हम दोनों मिल कर एक ही रेखा से... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[16 Mar 2009 01:28 AM]

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