गजल

ज्ञानसिंधु चाँद शैरी की गजल मुल्क तूफाने बला की जद में है दिल सियासत दान का मसनद में है अब मदारी का तमाशा छोड कर कल वो आदमी संसद में है एकता का तो दिलों में है मुकाम वो कलश में हैं न वो गुम्बद में है जिंदगी भर खून से सींचा जिसे वो शजर मेरा निगाहे बद मे है फिर ह... [पूरी पोस्ट]
writer भगीरथ

गजल

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[16 Mar 2009 00:17 AM]

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