"वादों के पुष्प"
वादों के पुष्प" बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो मै आँचल यकीन का बिछाये उन्हें समेटती रही.... अपने स्पर्श की नमी से वो उन पुष्पों को जिलाता रहा मै मासूम शिशु की तरह उन्हें सहेजती रही...... हवाओं को रंगता रहा वो इन्द्रधनुषी ख्वाबो की तुलिका से मै बंद पलक...
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[15 Mar 2009 22:50 PM]



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