एक आदमी था

नवागंतुक एक कवि था या शायद कवि नहीं था- लाख कोशिश करता पर नहीं लिख पाता प्रेम कवितायें, नहीं मान पाता था घर के पास रहने वाली लड़की को चाँद या फ़िर परी | न उसे लड़कियों के परी होने पर यकीन होता , न ही चांद के लड़की होने का | लड़की उसके लिये व्रत रखती, पर वो नह... [पूरी पोस्ट]
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[15 Mar 2009 14:18 PM]

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