साहित्य ज्ञानपीठ और गुरु देव....
कुछ बात है के हस्ती मिटती नही हमारी । सदियों रहा है दुश्मन दौरें जहाँ हमारा ॥ शनिवार की सुबह ऐसे तो 11 बजे से पहले मेरी आँख नही खुलती कभी मगर आज का ये दिवस जैसे मेरे पुरे जीवन के लिए नही भूल सकने और मिटने वाली है । हमेशा से ही ये सोचता था के हर दिन ऐ...
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"अर्श"
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[15 Mar 2009 02:34 AM]



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