हमारी बिसरती परम्पराओं का आइना ये बक्सा
क़स्बा के ब्लॉग पे एल्मुनिम के बक्से की बहुत अच्छी कविता पढ़ी। मेरे अन्दर के कवि से रहा नही गया और मैंने कविता को अपनी तरफ़ से और विस्तार दे दिया। http://naisadak.blogspot.com/2009/03/blog-post_15.html कुछ सपने और ढेर सारी भावनाओ का अथाह समंदर बना जात...
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राकेश
हिन्दी कविता
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[15 Mar 2009 01:57 AM]



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