मौसम
यहाँ बेवक्त ,बेमौसम बदल छा गए हैं । सब कुछ ढंका -ढंका सा है , मन भी । हालाँकि शहर के बीचों बीच अब भी कई पलाश हैं जो दहक रहे हैं , वैसे मौसम तो दहकते पलाशों का ही है तुम्हारे शहर का मौसम कैसा है ...? ढंके ढंके से इस मौसम में एक आंच से , कुछ अनदेखे ,अन...
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सीमा रानी
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[14 Mar 2009 14:52 PM]



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