मौसम

kuch kavitayen kuch hain geet यहाँ बेवक्त ,बेमौसम बदल छा गए हैं । सब कुछ ढंका -ढंका सा है , मन भी । हालाँकि शहर के बीचों बीच अब भी कई पलाश हैं जो दहक रहे हैं , वैसे मौसम तो दहकते पलाशों का ही है तुम्हारे शहर का मौसम कैसा है ...? ढंके ढंके से इस मौसम में एक आंच से , कुछ अनदेखे ,अन... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा रानी
views
31
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
11
[14 Mar 2009 14:52 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix