लोकतंत्र पर हावी एक अदना सा आई.पी.एल.
पिछले कुछ हफ़्तों से बस दो ही विषय सुनायी दे रहे हैं पहला तो चुनाव और दूसरा आई.पी.एलअव्वल तो चुनाव के लिये ही मारामारी और काफ़ी हो-हल्ला मचा, नवीन चावला की बर्खास्तगी और नियुक्ति चर्चा का विषय बनीं लेकिन इन सबको एक कामयाब व्यापारी यां ये भी कह सकते हैं...
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कमलेश मदान
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[14 Mar 2009 08:03 AM]



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