पुते हुए चेहरों का सच..-"गुलाल"

मुसाफ़िर भूल जाइए कि,हिंदी फिल्मों का मतलब पेड़ों,सरसों के खेतों और बल्ले-बल्ले ही है.अनुराग कश्यप जैसे नयी पीढी के निर्देशकों ,फिल्मकारों ने हिंदी सिनेमा में एक ऐसी लहर पैदा की है ,जिससे जोहर,चोपडा की मार से डरे दर्शकों को एक नयी सुकून मिलती दिख रही है.साल के... [पूरी पोस्ट]
writer मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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[14 Mar 2009 01:21 AM]

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