आसमान से गिरा

हँसते रहो राजीव तनेजा*** ‘हाँ आ जाओ बाहर… कोई डर नहीं है अब…चले गए हैं सब के सब।’ मैं कंपकंपाता हुआ आहिस्ता से जीने के नीचे बनी पुरानी कोठरी से बाहर निकला। एक तो कम जगह ऊपर से सीलन और बदबू भरा माहौल, रही-सही कसर इन कमबख़्तमारे चूहों ने... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव् तनेजा
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[13 Mar 2009 13:28 PM]

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